खबरों का ठेका : गौतम बुद्ध नगर में यातायात माह 2025 के तहत ट्रैफिक पुलिस का अभियान केवल चालान काटने की कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह समाज को आईना दिखाने का प्रयास भी था। आंकड़े बताते हैं कि एक ही दिन में 10,524 चालान और 31 वाहन सीज किए गए। यह संख्या केवल नियम तोड़ने वालों की लापरवाही नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक मानसिकता का प्रतिबिंब है—जहां सड़क पर उतरते ही नियमों को बोझ समझ लिया जाता है।

बिना हेलमेट और प्रदूषण प्रमाणपत्र
4,510 लोग बिना हेलमेट और 690 वाहन बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के पकड़े गए। यह सवाल उठता है कि क्या हमारी सुरक्षा और पर्यावरण की जिम्मेदारी केवल पुलिस की कार्रवाई से तय होगी, या नागरिक खुद इसे अपनी आदत बनाएंगे।
जागरूकता की पहल
पुलिस ने छात्रों के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाया। गोल्डन आवर्स और राहगीर योजना जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। यह पहल बताती है कि सड़क सुरक्षा केवल दंड का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा और संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ है।
हापुड़ का स्टंट और जुर्माना
हापुड़ में बाइक पर खतरनाक स्टंट करने वाले युवकों पर 26 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह घटना स्पष्ट करती है कि रोमांच की तलाश में कुछ लोग न केवल अपनी जान से खेलते हैं, बल्कि दूसरों की जिंदगी भी खतरे में डालते हैं।
संपादकीय दृष्टि
सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन का प्रतीक हैं। जब नागरिक नियमों का पालन करते हैं, तो वे केवल जुर्माने से बचते नहीं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। पुलिस की कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन स्थायी समाधान तभी संभव है जब हम स्वयं को जिम्मेदार नागरिक मानें।
सड़क सुरक्षा का सवाल कानून से बड़ा है—यह हमारी संस्कृति, हमारी आदत और हमारी जिम्मेदारी का हिस्सा होना चाहिए।
